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स्नेह दीप

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deepawali 3deepawali 1दीपावली के इस शुभ अवसर पर जागरण टीम के सभी सदस्यों व जागरण जंक्शन के सभी ब्लागर्स और इस ब्लाग के सुधी पाठकों व उनके परिवार के सभी सदस्यों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं !!!!!! आप सब के लिए दीपावली का यह पर्व समृद्धिमय और मंगलमय हो !!!!!!!!!!!!!!!

deepawali 2

दीप जलाऊँ मैं एक स्नेह दीप जलाऊँ ,
बुझते दीपों में आशा की बाती लगाऊँ |
बैर भाव का कहीं तमस न रह जाए,
रात्रि में भी दिवस का भान हो जाए,
अंतर घट ये कलुषित न होने पाए |
आवली दीपों की सर्वत्र झिलमिलाए
घर आँगन सभी ज्योतिर्मय हो जाएँ!
प्रीति ह्रदय में ऐसी बढ़े कि
टूटते दिल एक जान हो जायँ|
दीप ऐसा जले कि रोशनी से उसकी ,
जुदा दिलों में आस, उजास भर जाय|
एक दीप से असंख्य दीप जलाऊँ मैं,
दीप जलाऊँ स्नेह दीप जलाऊँ !!!!!!!
और ये दीप जलते रहें!!!!!!जलते रहें!!!!!

दीपावली की मंगल कामनाओं के साथ
अलका

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20 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rahulpriyadarshi के द्वारा
January 7, 2011

उम्मीद है आपका यह दीपक सबका अँधियारा मिटाए.

    Alka Gupta के द्वारा
    January 22, 2011

    काश ! ऐसा हो जाए राहुल जी | प्रतिक्रया के लिए आपका बहुत आभार विलंबित उत्तर के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ धन्यवाद !

Aakash Tiwaari के द्वारा
November 23, 2010

अल्का जी, अगर मै ये रचना न पढ़ पाता तो शायद मै कुछ अच्छे विचारों से युक्त शब्दों को खो देता ..बहुत ही अच्छी कविता.. प्रीति ह्रदय में ऐसी बढ़े कि टूटते दिल एक जान हो जायँ| दीप ऐसा जले कि रोशनी से उसकी , जुदा दिलों में आस, उजास भर जाय| आकाश तिवारी

    alkargupta1 के द्वारा
    November 24, 2010

    आकाश जी, बस मन में उमड़ते विचारों की छोटी सी अभिव्यक्ति थी अगर आपको अच्छी लगीं ये पंक्तियाँ तो मेरा भी थोड़ा उत्साहवर्धन हुआ व लिखना  सार्थक रहा तथा प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया अपनी टिप्पणी देते रहें व होंसला अफज़ाई करते रहें।    आभार

priyasingh के द्वारा
November 9, 2010

घर आँगन सब ज्योतिर्मय हो जाये दीप जलाऊ मई स्नेह दीप जलाऊ ………….. बहुत अच्छी पंक्तिया ………दिवाली की सच्चाई का बखान करती एक उत्तम कविता….

    alkargupta1 के द्वारा
    November 10, 2010

    प्रिया जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

deepak joshi के द्वारा
November 9, 2010

अलका जी प्रणाम, बुझते दीपों में आशा की बाती लगाऊँ | बैर भाव का कहीं तमस न रह जाए, रात्रि में भी दिवस का भान हो जाए, अंतर घट ये कलुषित न होने पाए | जी हां इन दीपों से हमें भी कोई सीख लेनी चाहिए व कोई संकल्‍प लेना चाहिए। एक अच्‍छी सोच को दर्शती यह रचना के लिए बधाई। -दीपकजोशी63

    alkargupta1 के द्वारा
    November 10, 2010

    श्री दीपक जी अभिवादन, ज्योतिपर्व के ये दीप सभी के अंतर में अखंड जयोति प्रज्ज्वलित करें इसी आशा में मन के उदगारों की जागरण मंच पर एक छोटी सी अभिव्यक्ति थी। प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद

abodhbaalak के द्वारा
November 7, 2010

अलका जी, इश्वर से प्रार्थना है की इन दीपों के प्रकाश में, सारे अंधकार, हमारे भीतर और बहार के समाप्त हो जाएँ, सपरिवार आपको दीपावली की ढेर सारी बंधाई http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    alkargupta1 के द्वारा
    November 8, 2010

     इस प्रकाश पर्व पर उद्गगारों की एक  छोटी सी प्रस्तुती थी , अबोध जी। आपको तथा आपके परिवार को मेरी भी हार्दिक बधाई व  ढेरों शुभकामनाएं । प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद 

atharvavedamanoj के द्वारा
November 4, 2010

नंदा दीप जलाना होगा| अंध तमस फिर से मंडराया, मेधा पर संकट है छाया| फटी जेब और हाँथ है खाली, बोलो कैसे मने दिवाली ? कोई देव नहीं आएगा, अब खुद ही तुल जाना होगा| नंदा दीप जलाना होगा|| केहरी के गह्वर में गर्जन, अरि-ललकार सुनी कितने जन? भेंड, भेड़िया बनकर आया, जिसका खाया,उसका गाया| मात्स्य-न्याय फिर से प्रचलन में, यह दुश्चक्र मिटाना होगा| नंदा-दीप जलाना होगा| नयनों से भी नहीं दीखता, जो हँसता था आज चीखता| घरियालों के नेत्र ताकते, कई शतक हम रहे झांकते| रक्त हुआ ठंडा या बंजर भूमि, नहीं, गरमाना होगा| नंदा दीप जलाना होगा ||…………………………….मनोज कुमार सिंह ”मयंक” आदरणीय अलका जी, आपको और आपके सारे परिवार को ज्योति पर्व दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं || वन्देमातरम

    Alka Gupta के द्वारा
    November 4, 2010

    मनोज जी ,वन्देमातरम  बहुत अच्छी पंक्तियाँ हैं ……. प्रतिक्रिया के लिए बहुत धन्यवाद। दीपावलीके शुभ अवसर पर आपको भी व आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं।

rajkamal के द्वारा
November 4, 2010

आदरणीय अलका जी ..अभिवादन ! बहुत अच्छी सोच …समुचि मानवता कि भलाई कि मंगल कामना करती हुई कविता … आपको भी सपरिवार दीपावली कि मंगल कामनाये ….

    Alka Gupta के द्वारा
    November 4, 2010

    राजकमल जी,नमस्कार दिवाली के पर्व पर मन  में उठे उदगारों की छोटी सी अभिव्यक्ति थी। बस जागरण मंच पर आप सबके समक्ष प्रस्तुत कर दी। आपकी सुंदर प्रतिक्रिया के  लिए बहुत आभार।   आपको व आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।.

Alka Gupta के द्वारा
November 4, 2010

श्री पारीक जी, अभिवादन  । सर्व प्रथम आपको व आपके परिवार के सभी सदस्यों को  दीपावली के शुभ अवसर पर हार्दिक शुभ कामनाएं परिवार खुशियों से फलता फूलत रहे। आपकी सुंदर प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद।

bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
November 4, 2010

सुश्री अलका गुप्‍ता जी, सुन्‍दर कविता, सरल व सहज अभिव्‍यक्ति । दीप जलानें के माध्‍यम से आशा का संचार करती कविता । सामयिक व सार्थक रचना । दीपावली पर आपकों व आपके पूरे परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं । अरविन्‍द पारीक

nishamittal के द्वारा
November 4, 2010

सबका अज्ञान रूपी अन्धकार मिटे,प्रेम की ज्योति जलती रहे .सुन्दर पंक्तियों के लिय बधाई.

    Alka Gupta के द्वारा
    November 4, 2010

    निशा जी,प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद।

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
November 4, 2010

एक दीप से असंख्य दीप जलाऊँ मैं, दीप जलाऊँ स्नेह दीप जलाऊँ !!!!!!! और ये दीप जलते रहें!!!!!!जलते रहें!!!!! सुन्दर पंक्तियों से सजे इस लेख के लिए हार्दिक बधाई…………. आपको और आपके पुरे परिवार को हमारी और से दिवाली की हार्दिक बधाई ……….. ये दिवाली आपके और आपके परिवार को ढेरों खुशियाँ दे…………..

    Alka Gupta के द्वारा
    November 4, 2010

    पियूष जी, दिवाली अपने परिवार के साथ हँसी खुशी से मनाएं व  समृद्धिमय हो मंगल कामनाओं के साथ। प्रतिक्रिया के लिए बहुत आभार। 


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