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``प्यार का घरौंदा और ये अस्तित्व-Valentine contest ''

Posted On: 12 Feb, 2011 Others में

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प्रथम भोर की अरुणाभ किरणें
झरोंखों से रुख करती जब इधर
करा जाता है आभास यह कि
हर रोज़ होता एक नया सवेरा है |
_______________________________

अपने नव-नव रूपों में
नित नए रंग भर जाते तुम |
चाँद रोशन होता है अम्बर में
औ अस्तित्व तुम्हारा चांदनी में |
_________________________________

बहती झील के अनमोल प्रस्तर हो
मंथन जीवन का करते जब हो |
मिल जाता वही जिसकी चाहत हो
तुम साधना औ जीवन का आधार हो |
__________________________________

चलते-चलते पथ पर रंग बिखेरते
संग राही चले हो बहुत दूर से |
ये नज़रें जिन्हें ढूंढ रहीं हैं
वो ही तो तुम मेरी मंज़िल हो |
___________________________________
मुद्दतें तो गुज़र गयी राहें तो अभी बाकी हैं
प्यार से बनाया यह घरौंदा तो बातें भी बाकी हैं !
मिल बैठ गुनगुनायेंगे जहाँ प्रेम गीत
होगा जिसमें चिर स्पंदन अभीत !!

_________*******__________

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23 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

baijnathpandey के द्वारा
February 14, 2011

आदरणीय अलका जी ……..आप शब्दों की एक चतुर शिल्पिकार हैं ….बधाई स्वीकारें

    Alka Gupta के द्वारा
    February 15, 2011

    बैजनाथ जी , बहुत ज्यादा तो नहीं बस भावों को थोड़ा बहुत कुछ पंक्तियों में अभिव्यक्त कर देतीहूँ आपने पसंद की मेरा हार्दिक आभार !

vinitashukla के द्वारा
February 13, 2011

सुन्दर शब्द शिल्प से सजी संवरी कविता. बधाई अलका जी.

    Alka Gupta के द्वारा
    February 14, 2011

    विनीता जी , प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

nishamittal के द्वारा
February 13, 2011

अलका जी बहुत ही भावपूर्ण आपकी प्रेममय रचना.आपका प्रेम सदा बना रहे और हाँ हमारी दोस्ती भी.शुभकामनाएं.

    Alka Gupta के द्वारा
    February 14, 2011

    निशाजी , आपकी दुआएं साथ रहें बस ! और प्रेममय दोस्ती भी एक आदर्श दोस्ती की मिसाल रहेगी ! आपकी अनमोल प्रतिक्रिया के लिए मेरा हार्दिक आभार !

rajkamal के द्वारा
February 12, 2011

aadrniy अलका जी …सादर अभिवादन ! मुझको कविता की इतनी समझ नही है , इसलिए मैं इसके बारे में कुछ ज्यादा नही ख सकता सिवाय इसके की इसमें प्रयुक्त भाव बहुत ही सुंदर है हमेशा की ही तरह ….

    Alka Gupta के द्वारा
    February 13, 2011

    राजकमल जी , अभी-अभी मैने आपकी दो कवितायें पढीं और अपनी प्रतिक्रिया भी दी अगर समझ नहीं तो यह काव्य रचना कैसे की? फिर आप नाहक ही कहते हो कि ‘ मुझे कविता की समझ नहीं है ‘ आपको तो हर विधा में महारथ हासिल है ! ईश्वर प्रदत्त इस प्रतिभा के प्रति ऐसा क्यों कहना ! आपने कविता पढी और उसके भाव अच्छे लगे हार्दिक आभार !आप मेरे किसी भी ब्लॉग पर जो कुछ भी लिख कर आपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं सबसे हटकर अलग ही होती है सदैव ही स्वागत है यहाँ ! धन्यवाद

rita singh 'sarjana' के द्वारा
February 12, 2011

अलका जी , नमस्कार l समय पर प्रतिक्रिया न दे पाने के लिए खेद हैं l आपकी ये पंक्तिया बहुत अच्छी लगी -मुद्दतें तो गुज़र गयी राहें तो अभी बाकी हैं प्यार से बनाया यह घरौंदा तो बातें भी बाकी हैं ! मिल बैठ गुनगुनायेंगे जहाँ प्रेम गीत होगा जिसमें चिर स्पंदन अभीत !! बधाई व् शुभकामनाओं सहित ……………

    Alka Gupta के द्वारा
    February 13, 2011

    रीता जी , आपको पंक्तियाँ अच्छी लगी आभार !

Bhagwan Babu के द्वारा
February 12, 2011
    Alka Gupta के द्वारा
    February 13, 2011

    प्रतिक्रिया के लिए बहुत धन्यवाद !

priyasingh के द्वारा
February 12, 2011

आपकी कविता की प्रथम चार पंक्तिया बहुत कुछ कह गयी …… हर रोज़ होता एक नया सबेरा है …….. बहुत सुन्दर रचना ………

    Alka Gupta के द्वारा
    February 13, 2011

    प्रिया जी, हार्दिक आभार !

Rita Singh, 'Sarjana' के द्वारा
February 12, 2011

अलका जी , नमस्कार l वाह : बहुत ही सुन्दर पंक्तिया …. मुद्दतें तो गुज़र गयी राहें तो अभी बाकी हैं प्यार से बनाया यह घरौंदा तो बातें भी बाकी हैं ! मिल बैठ गुनगुनायेंगे जहाँ प्रेम गीत होगा जिसमें चिर स्पंदन अभीत !! बधाई व् शुभकामना सहित ……………

Nikhil के द्वारा
February 12, 2011

बहुत खुबसूरत अभिव्यक्ति. बधाई.

    Alka Gupta के द्वारा
    February 13, 2011

    निखिल जी , बहुत बहुत धन्यवाद !

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
February 12, 2011

खूबसूरत रचना के लिए बधाई……..

    Alka Gupta के द्वारा
    February 13, 2011

    पियूष जी , प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार !

आर.एन. शाही के द्वारा
February 12, 2011

अलका जी, अनुपम भावाभिव्यक्ति । शाब्दिक टिप्पणी की पहुंच से बहुत बाहर है ये । साधुवाद ।

    Alka Gupta के द्वारा
    February 13, 2011

    श्री शाही जी , सादर अभिवादन सराहना के लिए मेरा हार्दिक आभार ! और आप जैसे उच्च स्तरीय लेखक व समालोचक की टिप्पणी तो बहुत ही सारगर्भित होती हैं जिनसे एक कदम और आगे जाने का मनोबल बढ़ता है मेरे लिए तो आपकी यही शाब्दिक टिप्पणी का बहुत महत्त्व है शाही जी ,मेरी रचनाओं पर आपकी टिप्पणियां सदैव अपेक्षित हैं ! हार्दिक धन्यवाद

Aakash Tiwaari के द्वारा
February 12, 2011

आदरणीय अलका जी, मुझसे पूँछिये की क्या अच्छा लगा तो मै तुरंत जवाब दूंगा.. मुद्दतें तो गुज़र गयी राहें तो अभी बाकी हैं प्यार से बनाया यह घरौंदा तो बातें भी बाकी हैं ! बहुत अच्छी लाइने…. आकाश तिवारी

    Alka Gupta के द्वारा
    February 13, 2011

    आकाश जी , आपके जवाब को सम्मान देती हूँ ! मेरा हार्दिक शुक्रिया !


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