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भाग्य की विडम्बना !

Posted On: 18 Feb, 2011 Others,न्यूज़ बर्थ में

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सूर्य की प्रचंडता से तप्त
धरा पर थी तेज़ दोपहरी !
जर्जर थी उसकी काठ सी काया
ज़िंदगी लदी सी थी बोझों तले
____________________________
तन ढका था न पांव
उदर पृष्ठ की समवेत काया थी !
क्षीण हुई मुख कान्ति
ज्यों लगा हो ग्रहण चाँद पर !
___________________________
कोई न था रक्षक
सभी थे उसके भक्षक
आँखों में न शर्म थी न लाज
जैसे विधाता ने रचा हो कोइ खिलौना इनका !
_________________________________
बिजली सी कौंधी……!
प्रश्न का अंकुर हुआ प्रस्फुटित
कितने जन्मे अब तो `यहाँ’ असुर
कैसे बढ़ गया रेला इनका अपार ?
_________________________________
कर रहे नित्य प्रति ये जघन्य दुराचार
सिसक-सिसक कर रोवें कलियाँ द्वार-द्वार
हो रहे नर संहार भारी
अबलाओं की भी हो रही दुर्दशा न्यारी!
__________________________________
हृदय हुआ बड़ा आहत
किस किसके मन को दें राहत
कैसे करें इनको सुखी-शांत ?
भाग्य की कैसी है ये विडम्बना !
_____________________________________
हर गाँव , कस्बा, शहर , गली-गली
औ चौराहे पर बजता इनका ही बिगुल है
विगुलाघात से व्याकुल कब होगा
अब राम-सा कोई अवतार…….?
कब होगा कोई राम-सा अवतार ?????>
_____********_____

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26 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

baijnathpandey के द्वारा
February 26, 2011

आदरणीय अलका जी सच्चाई के वीभत्स रूप से रूबरू कराती बेहतरीन रचना …..धन्यवाद

    alkargupta1 के द्वारा
    February 27, 2011

    बैजनाथ जी , इस रचना पर भी दी गयी आपकी अमूल्य प्रतिक्रिया के लिए मेरा हार्दिक आभार !

nishamittal के द्वारा
February 25, 2011

नारी की असहाय स्तिथि जो की आज भी वास्तविकता है को बहुत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करती रचना अलका जी.

    alkargupta1 के द्वारा
    February 27, 2011

    निशा जी , अपने व्यस्त रहते हुए भी मेरे लिए अपना अमूल्य समय दिया बहुत अच्छा लगा आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए मेरा हार्दिक धन्यवाद !

rita singh \\\'sarjana\\\' के द्वारा
February 19, 2011

अल्काजी , वाह : बहुत खुब्सुरुती से सजी कविता ,बधाई

    Alka Gupta के द्वारा
    February 20, 2011

    रीता जी , बहुत बहुत धन्यवाद !

Harish Bhatt के द्वारा
February 19, 2011

आदरणीय अलका जी सादर प्रणाम, बेहतरीन रचना के लिए हार्दिक बधाई.

    alkargupta1 के द्वारा
    February 20, 2011

    भट्ट साहब , प्रतिक्रिया के लिए आपको मेरा हार्दिक आभार !

RajniThakur के द्वारा
February 19, 2011

अलका जी, स्त्री की वर्तमान स्थिति को आइना दिखलाती आपकी यह रचना बहुत-कुछ सोचने पर विवश कर देती है..आखिर कब तक ..? बेहतरीन रचना के लिए बधाई.

    Alka Gupta के द्वारा
    February 20, 2011

    रजनी जी, आपकी अमूल्य प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

rajkamal के द्वारा
February 19, 2011

आदरणीय अलका जी …सादर प्रणाम ! आप की इस कविता में आपके मन की व्यथा झलकती है और भगवान पर विश्वाश भी दिखलाई देता है ….. बधाई और मुबारकबाद

    Alka Gupta के द्वारा
    February 20, 2011

    राजकमल जी , ईश्वर ही वह सर्वोच्च शक्ति है जिस पर दृढ़ आस्था व अखंड विश्वास से ही कार्य सिद्धि हो जाती है जब स्थिति अपने नियंत्रण से बाहर हो जाती है तो मात्र यही सहारा बचता है ! आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए मेरा हार्दिक आभार !

आर.एन. शाही के द्वारा
February 18, 2011

अलका जी, आपकी अन्य रचनाओं की भांति ही एक संवेदनशील रचना … बधाई ।

    Alka Gupta के द्वारा
    February 20, 2011

    श्री शाही जी , सादर अभिवादन आपकी प्रतिक्रिया से मन को बहुत शांति मिलती है आपकी अनमोल प्रतिक्रिया के लिए मेरा हार्दिक आभार !

rameshbajpai के द्वारा
February 18, 2011

कोई न था रक्षक सभी थे उसके भक्षक आँखों में न शर्म थी न लाज जैसे विधाता ने रचा हो कोइ खिलौना इनका ! _________________________________ आदरणीया अलका जी यह समाज अपनी संवेदना को खोता जा रहा है देखते है कितना पतन होना बाकि है अभी

    Alka Gupta के द्वारा
    February 20, 2011

    श्री बाजपेयी जी , सादर अभिवादन बहुत अच्छा लगा आपकी प्रतिक्रिया पढ़कर इस गुंडाराज से तो समाज का पूर्ण पतन ही होना है| प्रतिक्रिया के लिए मेरा हार्दिक आभार !

Aakash Tiwaari के द्वारा
February 18, 2011

आदरणीया अलका जी, मै वाहिद भाई की बातों से पूर्णतया इत्तेफाक रखता हूँ…..अब तारणहार की बहुत जरूरत है,….. आकाश तिवारी

    Alka Gupta के द्वारा
    February 20, 2011

    आकाश जी , प्रतिक्रिया के लिए आपको मेरा हार्दिक शुक्रिया !

    Essence के द्वारा
    September 21, 2011

    Heck of a job there, it absolutley helps me out.

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 18, 2011

आदरणीया अलका जी, सुन्दर संदेशपरक रचना ने बहुत प्रभावित किया| आज के दौर में समाज को सचमुच एक तारणहार की ज़रुरत है| साभार,

    Alka Gupta के द्वारा
    February 20, 2011

    वाहिद जी , काव्य हृदय को मेरे इस छोटे से प्रयास ने प्रभावित किया जानकर बहुत अच्छा लगा आपके वैचारिक समर्थन के लिए मेरा हार्दिक शुक्रिया !

allrounder के द्वारा
February 18, 2011

अलका जी, नमस्कार ! जिस तेजी से आज बलात्कार और यों शोषण की बारदातें बढती जा रही हैं, उन्हें देख कर मन मैं एक वेदना और आक्रोश पैदा होता है ऐसे मनोवृति के लोगों के खिलाफ ! इसी वेदना को अच्छे शब्दों मैं व्यक्त करने के लिए आपको हार्दिक बधाई !

    allrounder के द्वारा
    February 18, 2011

    अलका जी आपको Valentine कांटेस्ट के अंतिम 5 प्रतिभागियों मैं शामिल किया गया है उसके लिए आपको हार्दिक बधाई !

    alkargupta1 के द्वारा
    February 19, 2011

    सचिन जी , ऐसी विकृत मानसिकता वाले लोगों को तो देश से बहिष्कृत ही कर देना चाहिए इन्हें तो सीधे सीधे फाँसी की सज़ा ही मिलनी चाहिए……बस आजकल तो गुंडाराज के चलते ही इतना दुराचार ,शोषण जैसी वारदातों को आज़ादी मिल रही है….बस हम सब सर्वत्र सुख शान्ति स्वस्थ वातावरण बनाये रखने की केवल ईश्वर से प्रार्थना ही कर सकते हैं इससे ज्यादा और क्या कर सकते हैं…..! प्रतिक्रिया के लिए आपका हार्दिक आभार ! और अंतिम ५ प्रतिभागियों में मेरा नाम है यह सर्वप्रथम आपके द्वारा ही पता चला मुझे तो इस बारे में कुछ भी नहीं पता है अभी आपके सूत्र तो बहुत ही शक्तिशाली मालूम पड़ते हैं…… ! अगर ऐसा है तो यह सब आप सभी के प्रोत्साहन , उत्साहवर्धन और अपार स्नेह का ही प्रतिफल है इसमें मेरा कुछ भी नहीं है चलिए देखते हैं आगे क्या होता है…….! आपको मेरा हार्दिक धन्यवाद !

    Alka Gupta के द्वारा
    February 20, 2011

    सचिन जी, यह प्रतिक्रिया आपके द्वारा दी गयी वैलंटाइन संबंधी सूचना से ही सम्बंधित है मैने एक लाइन आपके लिए लिखी थी- आपके सूत्र तो बहुत ही शक्तिशाली मालूम पड़ते हैं | मैं यही कहना चाहती हूँ कि अगर थोड़ा सा भी आपके मन को इस लाइन से ठेस पहुँची हो तो कृपया इसके लिए मैं क्षमाप्रार्थी हूँ क्योंकि जिस सूत्र से आपको पता चला वही मेरा व हम सभी का था और मैं इससे बेखबर थी मैं तो अपना जा.जं. से सम्बंधित मेल ही चेक करती थी अभी जब अपना मेल देखा तो किसी के मेल से मुझे प्रतिभागियों के नाम देखने का लिंक मिला…..जब देखा तो j j मिला फिर तो मैने अपने महामूर्खाधिराज की श्रेणी मे ही रख दिया और इससे ज्यादा मैं अपने आप को क्या कहूं बस अपने लिए ……आँख के अंधे नाम नयनसुख ही सही बैठती है इसलिए अगर थोड़ा भी फील किया हो सॉरी सचिन जी ! हार्दिक आभार

    allrounder के द्वारा
    February 21, 2011

    अलका जी, सादर नमस्कार सबसे पहले तो आप अपने मन से ये बात निकाल दीजिये की मुझे आपके किसी भी जवाव से बुरा लगा होगा बल्कि आपके दोनों ही जवाव पढ़कर मुझे बहुत ही हंसी आ रही है, की अलका जी ने ये क्या लिख दिया मेरे संपर्क सूत्र JJ पर कितने तगड़े हैं, दरअसल ये लिस्ट शुक्रवार शाम को आई और शायद सबसे पहले मैंने ही पढ़ी और अपना मंच का साथी होने का दायित्व निभाते हुए मैंने सारे ही विजेताओं को बधाई सन्देश लिखा ! आपको लगा हो शायद मैं मजाक कर रहा हूँ, और आखिर मैं हास्य रचनाये ज्यादा लिखता हूँ इसलिए मेरी बातों को शायद आपने गंभीरता से न लिया हो, किन्तु आखिर आपको जब पता चला तो आपको अवश्य बुरा लगा होगा और यकीन मानिए आपकी जगह अगर मैं होता तो शायद मेरी भी यही प्रतिक्रिया होती ! अत आपसे मेरा निवेदन है आप किसी प्रकार का बोझ अपने दिल पर न ले ! धन्यबाद !


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