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इस पावन धरणी को नमन !

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धन्य हुई जन्म लेकर अंक में भारत की
लिपटी तन पर सौंधी गंध इसकी माटी की |
सुगंध लेने को यहाँ की तरसते परदेसी भारती
जहाँ बहती हों गंगा , यमुना औ सरस्वती |
——————————————————–
नीलाभ परिधान से आवृत है
रवि मस्तक पर विराजित है|
हिमालय ताज-सा शुभ्र मुकुट
तारा मंडन पुष्पों से सुवासित है |
———————————————————
शशि की सुधा सम शीतलता
सागर भी जिसके चरण पखारता |
जलधि अन्तः उर पर करती नृत्य लहरें
मनहूँ धरणी प्रांगण में थिरकतीं बालाएं |
——————————————————–
खग वृन्द बनें चारण जहाँ पर
लघु वारिद खंड करते अभिषेक |
मृदु नीर भी अमृत सम उत्तम
शीत मंद पवन भी हुई उन्मत्त |
——————————————————
भारत की पावन माटी में जन्म लिया
भगत सिंह, राजगुरु, सुभाष औ देश के वीर व्रतधारी |
न जाने कहाँ हो गए लुप्त माँ के ये सपूत
कहीं खो गई संस्कृति , सभ्यता हमारी पुरानी ?
——————————————————–
क्या अंतस में याद आयेगी कभी इनकी ?
बहाईं थी जिन्होंने रक्त की नदियाँ |
होकर रक्त-रंजित दे रहे सन्देश सभी यही
जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपिगरीयसी !!!
———————————————————–
गूँज उठे सप्त स्वर अंतर में
आओ, करें नमन देश के वीर सपूतों को !
नमन पावन धरणी को …..नमन वीर सपूतों को

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32 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

JLSINGH के द्वारा
April 6, 2011

खग वृन्द बनें चारण जहाँ पर लघु वारिद खंड करते अभिषेक | मृदु नीर भी अमृत सम उत्तम शीत मंद पवन भी हुई उन्मत्त अलका जी, सादर प्रणाम! आपकी उन्मादिनी कविता पर मैं क्या करूँ अभिव्यक्त. यह भ्रमर तो खो गया, पुष्प के आगोश में, हो गया मद मस्त. शस्य श्यामला इस धरनी के पुत्र हैं अलबत्त. विश्व कप को चूम रहे हैं सभी हो गये मस्त.

    Alka Gupta के द्वारा
    April 20, 2011

    सिंह साहब , देर से उत्तर देने के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ आपकी सुन्दर काव्यात्मक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार !

abodhbaalak के द्वारा
March 26, 2011

अलका जी आपकी रचना अपने आप में एक अलग छाप छोड़ देती है . सुन्दर …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Alka Gupta के द्वारा
    April 1, 2011

    अबोध जी, आज बहुत दिनों बाद आपकी प्रतिक्रिया आई…. बहुत अच्छा लगा मैं भी कुछ व्यक्तिगत व्यस्ततावश नेट पर न बैठ पाने के कारण काफी देर से उत्तर दे रही हूँ इसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ! प्रतिक्रिया के लिए आपको मेरा हार्दिक आभार !

Rajkamal Sharma के द्वारा
March 25, 2011

बीत गई है होली , अब ना मैं कोई भी मजाक करूँगा करूँगा सबके साथ , पर ना तुम्हारे साथ करूँगा सजती रहेंगी यह महफिले सदा यूँ ही हमारे जाने के बाद भी आयेंगे यादो में , हसायेंगे यूँ ही हम जाने के बाद भी ************************************************************* aadrniy alka ji ….सादर अभिवादन ! आज आप का यह निराला और अनोखा अंदाज़ भी देखना था …. बहुत ओजस्वी , बधाई

    alkargupta1 के द्वारा
    April 1, 2011

    राजकमल जी, सर्वप्रथम तो में क्षमा चाहती हूँ काफी देर से उत्तर देने के लिए क्योंकि मैं कुछ अधिक व्यस्ततावश काफी दिनों से नेट पर नहीं बैठ पा रही थी ! अपने बहुत अच्छी पंक्तियाँ लिखीं हैं…! प्रतिक्रिया के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद !

Aakash Tiwaari के द्वारा
March 25, 2011

आदरणीया अलका जी, देश प्रेम से ओत-प्रोत रचना,….पर आपको बहुत-बहुत बधाई\ आकाश तिवारी

    Alka Gupta के द्वारा
    March 25, 2011

    आकाश जी , प्रतिक्रिया के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद ! शुभकामनाएं !

nikhil के द्वारा
March 25, 2011

क्या अंतस में याद आयेगी कभी इनकी ? बहाईं थी जिन्होंने रक्त की नदियाँ | होकर रक्त-रंजित दे रहे सन्देश सभी यही जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपिगरीयसी !!!

    alkargupta1 के द्वारा
    March 25, 2011

    बहुत धन्यवाद निखिल जी !

आर.एन. शाही के द्वारा
March 24, 2011

शहीद दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्र का महिमागान प्रेरणास्पद है अलका जी । बधाई ।

    alkargupta1 के द्वारा
    March 25, 2011

    शाही जी , सादर अभिवादन प्रोत्साहन हेतु प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करती हूँ !

nishamittal के द्वारा
March 24, 2011

अलका जी बहुत अच्छी रचना. हमारी भारत भूमि पर तो देवता भी जन्म लेने को तरसते हैं.प्रणाम कोटि कोटि.

    alkargupta1 के द्वारा
    March 25, 2011

    निशा जी, प्रतिक्रिया के लिए आपको मेरा हार्दिक धन्यवाद !

kmmishra के द्वारा
March 24, 2011

मुझे पूरा भरोसा हो गया है ही भारत में अभी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है.  अंगारों पर राख जरूर आ गयी हो मगर वे पूरे  ताकत से धधक रहे है.  सरकारें चाहें भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, आजाद को आतंकवादी कहें लेकिन वो हमारे सीनों में  धडकते हैं,  लहू बन कर उफनते हैं,  और कलम से निकलते हैं तेजाब बन कर.  वे कभी खत्म नहीं हो सकते.  वो अमर हैं हमरी यादों में और जन्म लेते हैं हमेशा दुबारा आने के लिए  इस माटी में खेलने के लिए और इस पे कुर्बान हो जाने के लिए.  शहीदों की चिताओं पर अब नहीं लगेंगे हर बरस मेले क्योंकि  वो हर  दिन धधकती हैं हमारे  सीनों में. भारत माँ को समर्पित ,एक बेहतरीन कविता के लिए आभारी हूँअलका जी आपका.  जय भारत. 

    alkargupta1 के द्वारा
    March 25, 2011

    मिश्रा जी, इस रचना पर देश के प्रति आपकी सारगर्भित विचारोत्तेजक प्रतिक्रिया को अति सम्मान देती हूँ !….आपकी इन बहुमूल्य पंक्तियों का पूर्ण वैचारिक समर्थन करती हूँ ! सरकारें तो लूली लंगडी हो चुकी हैं……हमारे ये क्रांतिकारी वीर किसी तरह भी आतंकवादी की श्रेणी में नहीं आ सकते हैं…..बस आवाजें बुलंद रहें….ज्वाला तो और भी भड़केगी ! आपके शब्दों के लिए पुनः धन्यवाद !

बनारसी बाबू के द्वारा
March 24, 2011

प्रथम बार आपकी कोई कृति पढ़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ अत्यधिक सुन्दर हैं आपकी पंक्तियाँ।  भारत माता को समर्पित आपकी यह रचना देशप्रेम की भावना जगाती है। धन्यवाद,

    alkargupta1 के द्वारा
    March 25, 2011

    आपकी प्रथम प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करती हूँ ! अन्य रचनाओं पर भी अपने अमूल्य विचारों से अवगत कराएँ ! और बनारसी जी, आपकी नई रचना ‘कैसी ये होली ‘ पर २-३ बार प्रयत्न करने पर भी टिप्पणी नहीं जा रही है हो सकता है कोई तकनीकी समस्या हो कृपया समाधान करने का प्रयत्न करें ! आभार

aftab azmat के द्वारा
March 24, 2011

अलका जी, नमस्कार…आपकी इस शानदार कविता को मेरा नमन..

    alkargupta1 के द्वारा
    March 25, 2011

    आफताब जी, प्रतिक्रिया के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया अदा करती हूँ !

vinita shukla के द्वारा
March 24, 2011

शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि देती हुई सुन्दर कविता. बधाई अलका जी.

    alkargupta1 के द्वारा
    March 25, 2011

    विनीता जी , प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार !

Harish Bhatt के द्वारा
March 24, 2011

आदरणीय अलका जी सादर प्रणाम. एक उत्कृष्ट कविता के लिए हार्दिक बधाई.

    alkargupta1 के द्वारा
    March 25, 2011

    भट्ट जी, प्रतिक्रिया के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद !

rachna varma के द्वारा
March 24, 2011

आदरणीय अलका जी , बहुत सुंदर अभिव्यक्ति सच में \"नमन इस मिटटी को जिसमे हमने जन्म लिया , नमन उन वीर सपूतो को जिनके बल पर यह देश आजाद हुआ ! \"

    alkargupta1 के द्वारा
    March 25, 2011

    रचना जी , प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार !

Baijnath Pandey के द्वारा
March 24, 2011

आदरणीया अलका जी अंतःकरण प्रफुल्लित हो उठा ऐसी कविता पढ़कर ……..सचमुच आज हम वो बलिदान भूल चुके है ………हम अब केवल अपने निहित स्वार्थों के लिए लड़ते प्रतीत होते है भारतमाता के लिए नहीं | इस देश में जिस किसी ने भी भारतमाता का नाम चीख-चीख कर लिया उसी ने उसके उसके आँचल पर सैकड़ों दाग लगाये ………..यह देखकर क्लेश होता है | आपकी कविता उन देशभक्तों को सच्ची श्रधांजलि है |

    alkargupta1 के द्वारा
    March 25, 2011

    बैजनाथ जी , इस कविता से आप जैसे युवा पीढी का मन प्रसन्न हुआ जानकर बहुत खुशी हुई…अपने बहुत सही कहा है कि आज हम सर्वत्र ही अपने स्वार्थों के लिए ही लड़ रहे हैं जिस भारत माता की अंक में हम पल ,बढ़ रहे हैं ओर जिसकी आन बान और शान के लिए जिन्होंने अपनी कुर्बानियां दी अगर थोड़ा भी याद कर लें सच में इनके प्रति यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी! बस थोड़ी सी जागरूकता की आवश्यकता है आज ! आपने अपने सुन्दर विचारों से अवगत कराया ,हार्दिक आभार !

ashvinikumar के द्वारा
March 24, 2011

आदरणीय अलका जी ,,वैसे आदरणीय कहने के पश्चात नाम लेना मुझे कुछ अनुचित प्रतीत होता है ,,शुबह की सुन्दर शुरुवात ,,वैसे एक बात कहना चाहता हूँ यह लोग /भावनाएं अभी भी हमारें ह्रदय में हैं ,,कुछ अति आधुनिक एवं छद्म आवरणधारी लोगों की बात नही कर रहा,, परन्तु हर सच्चा भारतीय अभी भी खुद में देश को जीता है ….जय भारत

    alkargupta1 के द्वारा
    March 25, 2011

    अश्विनी जी , स्नेह व सम्मान के साथ कहे गए हर शब्द व नाम में एक अपनत्त्व ही झलकता है सब स्वीकार्य है , इसमें कुछ भी अनुचित नहीं…..आपके विचारों को सम्मान देती हूँ ! इस रचना पर आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए मेरा हार्दिक आभार !

Ramesh Bajpai के द्वारा
March 24, 2011

नमन पावन धरणी को …..नमन वीर सपूतों को आदरणीया अलका बहन भारत भूमि व माता के सपूतो को नमन करती यह अतुल्य भाव भरी वंदना मन को आह्लादित कर गयी | यहाँ की यह शश्य श्यामला धरा नीलाभ अम्बर , सब कुछ इस सिमट आया है इन उदगारो में | बहुत बहुत बधाई

    alkargupta1 के द्वारा
    March 25, 2011

    आदरणीय बाजपेयी , सादर अभिवादन इन पंक्तियों ने आपके मन को आह्लादित किया बहुत अच्छा लगा ! आपके आशीर्वाद स्वरूप प्रतिक्रया के लिए हार्दिक धन्यवाद !


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