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man ke udgaaron ki abhivyakti

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अनुत्तरित प्रश्न....... दुहिता की भिक्षा !

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तीन रूप लेकर जग में आती
माँ के ममत्त्व का सागर उड़ेलती |
पति- प्रेम में उन्मत्त प्रेम-रस की वर्षा करती
ये बेटी ही तो वात्सल्य की बौछारें करती |
————————————————-
अय माँ ! मैं तो तेरे ही वंश का अंश,
क्यों करती तू मेरा सर्वदंश ?
क्या तू भूल गयी यहाँ ——
अपने ही रक्त की बहाईं थी नदियाँ?
———————————————-
एक नारी से ही तू भी जन्मी ,
धन्य हो पृथ्वी पर वह नारी !
जिसने वीर सुभाष औ गांधी दिए !
इंदिरा औ झांसी की रानी को
तुझ-सी नारी ने ही जन्मा !
————————————————
क्या मुझे नहीं देगी यह अधिकार तू !
क्यों छीन रही हक़ मेरा यूं ?
उत्कट अभिलाषा है मन में
जग में तो आने दे मेरी मैया !
————————————————-
मन पर राज करूंगी तुम्हारे
तन्हाई जब गले लगेगी आके |
भड़केगी ‘भीतर’ जब कोई चिंगारी
राह देखती होगी तू भी——–
—————————————————
किसी दीप-शिखा के आने की !
वही ज्योति तेरी बनूँगी
स्वालोक से तुझे आलोकित करूंगी !
मत छीन मेरा अधिकार माँ……….!
मुझे आने दे जग में माँ…………..!

***********———-***********



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41 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
June 8, 2012

आप आजकल मंच पर बहुत कम दिख रही हैं क्या बात है? अल्काजी ,आप के हर ब्लॉग मैं अवश्य पढ़ती हूँ.कभी कभी कमेंट्स सबमिट नहीं हो पाते जैसा आज दिनेशजी के पोस्ट पर हो रहा है नमस्कार

    alkargupta1 के द्वारा
    April 13, 2013

    कुछ समयाभाव है व्यस्तता के चलते ..यह जे जे की समस्या है कुछ दिनों में ठीक हो जाएगी

yamunapathak के द्वारा
June 5, 2012

बहुत सुन्दर अल्काजी. मेरी बच्ची में मेरा ही अक्श समाया है बेटी माँ के बहुत kareeb hotee है

    alkargupta1 के द्वारा
    April 13, 2013

    बिलकुल सही व सार्थक प्रतिक्रिया यमुना जी

Ramashish Kumar के द्वारा
May 31, 2012

अलका जी नमस्कार आप का कविता बहोत ही अच्छा है .इसके लिए आप को बहोत बहोत धन्यवाद

    alkargupta1 के द्वारा
    April 13, 2013

    हार्दिक धन्यवाद रामाशीष जी

sadhanathakur के द्वारा
May 30, 2012

भाभी जी ,प्रणाम .बहुत ही अच्छी कविता …………..

    alkargupta1 के द्वारा
    May 30, 2012

    प्रिय साधना , शुभाशीष तुम्हें कविता अच्छी लगी जानकार ख़ुशी हुई…..शुभकामनाएं

vikramjitsingh के द्वारा
May 30, 2012

अलका जी…सादर प्रणाम… हैरानगी है….जिस कन्या का पूजन कराने की ‘मन्नत’ करते हैं….. उसी कन्या को अपना असितत्व बचाने के लिए ‘मिन्नत’ करनी पढ़ रही है… अति दुर्भाग्य…….

    alkargupta1 के द्वारा
    May 30, 2012

    जी हाँ विक्रम जी यही सत्य है अजन्मी व्यथित भ्रूण कन्या का…..उसे दुनिया में आने से पहले ही नष्ट कर दिया जाता है ……… प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
May 30, 2012

samvednaapurn kavitaa ke liye badhaai alkaa jee ! saadar !!

    alkargupta1 के द्वारा
    May 30, 2012

    हार्दिक धन्यवाद आचार्य जी

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 30, 2012

बहुत सुन्दर भाव युक्त रचना पर बधाई स्वीकार करें.

    alkargupta1 के द्वारा
    May 30, 2012

    प्रतिक्रिया हेतु हार्दिक आभार कुशवाह जी

May 30, 2012

सादर प्रणाम! मन पर राज करूंगी तुम्हारे तन्हाई जब गले लगेगी आके | भड़केगी ‘भीतर’ जब कोई चिंगारी राह देखती होगी तू भी—— एक बेटी की उपयोगिता सिद्ध करती हुई पक्तियां………………!

    alkargupta1 के द्वारा
    May 30, 2012

    धन्यवाद अनिल जी

akraktale के द्वारा
May 30, 2012

अलका जी सादर नमस्कार, मन पर राज करूंगी तुम्हारे तन्हाई जब गले लगेगी आके | भड़केगी ‘भीतर’ जब कोई चिंगारी राह देखती होगी तू भी——– बहुत ही मार्मिक पुकार एक कन्या भ्रूण की. सुन्दर भावमयी रचना के लिए हार्दिक बधाई.

    alkargupta1 के द्वारा
    May 30, 2012

    धन्यवाद अशोक जी

jlsingh के द्वारा
May 30, 2012

अलका जी, नमस्कार! प्रश्न चिन्ह तो है उस माँ पर जो अपने ही रक्त की नदियाँ बहाती है. कम से कम पढ़े लिखे सुशिक्षित परिवार में ऐसी घटनाएँ न हों यही प्रयास होनी चाहिए!

    alkargupta1 के द्वारा
    May 30, 2012

    सिंह साहब , आपकी बात से मैं भी पूर्ण रूप से सहमत हूँ ….मुझे कही न कहीं ऐसा लगता है किपढ़े लिखे व सुशिक्षित परिवारों के लोगों को भी इस विषय पर अपनी सोच को संकीर्णता के दायरे से हटाकर काफी विस्तृत करना होगा तभी संभव होगा……. आभार

anoop pandey के द्वारा
May 30, 2012

आदरणीय अलका जी बहुत दिनों बाद आपके लेख पर प्रतिक्रिया दे रहा हूँ इसकी वजह नेट से दूरी और कुछ व्यक्तिगत व्यस्तताए ही थीं . कन्या भ्रूण की मार्मिक पुकार को इतनी सुन्दरता से शब्दों में उकेरने के लिए बधाई.

    alkargupta1 के द्वारा
    May 30, 2012

    अनूप जी , एक लम्बे अंतराल के बाद आपकी प्रतिक्रिया मिली बहुत अच्छा लगा रचना पढी और अपनी प्रतिक्रिया दी हार्दिक आभार व्यक्त करती हूँ

dineshaastik के द्वारा
May 30, 2012

आदरणीय  अलका जी, अजन्मी बेटी की पीड़ा मुखरित हुई है आपकी रचना में। कविता के माध्यम से आपने कन्या भ्रूणों को जो शब्द  दिये  हैं, उसके लिये आपको भावों को नमन……

    alkargupta1 के द्वारा
    May 30, 2012

    आपके शब्दों का सादर सम्मान करती हूँ दिनेश जी साभार

चन्दन राय के द्वारा
May 29, 2012

अलका जी , इक कन्या भ्रूण की गर्भ से लगे ये कवितामय करुणय मिश्री से बोली सायद पत्थर ह्रदय का बंजरपन भेद अपने लिए प्रेम रोप सके , सायद जड़ता ख़त्म कर सके ,सायद ऊँगली पकड़ आपकी कविता उन्हें मजबूर कर दे अपने भीतर झाकने को , तीन रूप लेकर जग में आती माँ के ममत्त्व का सागर उड़ेलती | पति- प्रेम में उन्मत्त प्रेम-रस की वर्षा करती ये बेटी ही तो वात्सल्य की बौछारें करती गंभीरता से पढ़कर विचार करने वाली आपकी बेहतरीन पंक्तिया

    alkargupta1 के द्वारा
    May 30, 2012

    इस रचना के साथ आपके विचारों और शब्दों को गति मिले और कन्या भ्रूण हत्या को किसी भी तरह रोका जा सके बस यही कामना करती हूँ चन्दन जी प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद

Rajkamal Sharma के द्वारा
May 29, 2012

Aadrniy अलका जी …..सादर प्रणाम ! एक अजन्मी बेटी के मुख से बाकी सभी अजन्मी बेटियों की पीड़ा का बखान करती हुई है आपकी यह कविता जो भी वायदे अपनी माता से वोह करती चली जा रही है अक्सर वही गुणों से भरपूर होती है सभी बेटिया ….. जय श्री कृष्ण जी :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-)

    alkargupta1 के द्वारा
    May 30, 2012

    राजकमल जी , वैचारिक समर्थन हेतु हार्दिक आभार और ये हंसती मुस्कराती आपकी स्मायलीज़ भी अपनी इधर उधर चलाती आँखों व मुंह से मुझे अपना पूर्ण समर्थन दे रहीं हैं…..साभार जय श्री कृष्ण जी

Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
May 29, 2012

परम आदरणीया अलका जी, सादर नमन- सुन्दर सन्देश देती रचना के लिए बधाई…………. एक नारी से ही तू भी जन्मी , धन्य हो पृथ्वी पर वह नारी ! जिसने वीर सुभाष औ गांधी दिए ! इंदिरा औ झांसी की रानी को तुझ-सी नारी ने ही जन्मा ! भावात्मक सन्देश…………………………. मेरा गीत: आपके आशीर्वाद की प्रतीक्षा कर रहा है.

    alkargupta1 के द्वारा
    May 30, 2012

    हार्दिक धन्यवाद अंकुर जी आपके गीत पर भी अपने आशीर्वाद की वर्षा करकेअभी-अभी आई हूँ बहुत ही सुन्दर गीत है……बहुत अच्छा लिखते हैं…..लिखते रहिये शुभकामनाएं

vinitashukla के द्वारा
May 29, 2012

“मत छीन मेरा अधिकार माँ……….! मुझे आने दे जग में माँ…………..!” लाखों अजन्मे कन्या भ्रूणों का स्वर मुखरित हुआ है इस रचना में. बेहतरीन अभिव्यक्ति पर बधाई अलका जी.

    alkargupta1 के द्वारा
    May 30, 2012

    विनीता जी, रचना पर अपने विचारों से अवगत करने व प्रोत्साहन हेतु हार्दिक धन्यवाद

Meenakshi Srivastava के द्वारा
May 29, 2012

किसी दीप-शिखा के आने की ! वही ज्योति तेरी बनूँगी स्वालोक से तुझे आलोकित करूंगी ! मत छीन मेरा अधिकार माँ……….! मुझे आने दे जग में माँ…………..! अलका जी बहुत भाव पूर्ण उपर्युक पंक्तिया लगीं एवं झकझोर देने वाली ..ज़रूर पढ़कर कोई भी वैसा क्रूर कदम नहीं उठा पायेगी . बहुत-२ शुभ कामनाएं . मीनाक्षी श्रीवास्तव

    alkargupta1 के द्वारा
    May 30, 2012

    काश ऐसा हो मीनाक्षी जी तो कितना अच्छा हो जाये…! बार -बार मन में यही विचार उठता है कि इस संसार में आने से पहले ही उसका अधिकार छीन लिया जाता है आखिर क्यों ? यह प्रश्न मन को आहत कर जाता है हर किसी को इस जग में आने का अधिकार है…….. प्रतिक्रिया हेतु हार्दिक आभार

nishamittal के द्वारा
May 29, 2012

अलका जी,बहुत दिन बाद अजन्मी बेटी के प्रश्नों वाली आपकी रचना बहुत सुन्दर भावपूर्ण है.बधाई.

    alkargupta1 के द्वारा
    May 30, 2012

    धन्यवाद निशा जी

Santosh Kumar के द्वारा
May 29, 2012

आदरणीय माताश्री,..सादर प्रणाम आपकी रचना पर क्या लिखूं !…सादर अभिनन्दन ..

    alkargupta1 के द्वारा
    May 30, 2012

    प्रिय संतोष जी , आपकी सशक्त लेखनी द्वारा रचनाओं पर समालोचनाएँ सदैव ही अपेक्षित हैं…स्नेह बनाये रखिये

    alkargupta1 के द्वारा
    May 30, 2012

    हार्दिक शुभकामनाएं !

Mohinder Kumar के द्वारा
May 29, 2012

अल्का जी, भ्रूण हत्या और नारी के गौरव पर प्रशन्सनीय रचना… लिखते रहिये.

    alkargupta1 के द्वारा
    May 30, 2012

    मोहिंदर जी , सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद अपना स्नेह बनाये रखिये


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