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जीने की सही राह (लघु कथा)....कांटेस्ट

Posted On: 27 Jan, 2014 Others,social issues,Contest में

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शनिवार को सुपर्णा के छोटे बेटे आयुष के जन्म दिन की पार्टी का आयोजन था| देर रात तक गाना , नाचना चलता रहा | सुबह के नौ बज रहे थे सूर्य की किरणें सर्वत्र विकीर्ण हो चुकी थीं | पूरे घर में सूर्य आलोक का साम्राज्य छाया हुआ था | सुपर्णा उठी ही थी कि दरवाजे की कॉल बैल बजी उसने दरवाज़ा खोला सामने काम करने वाली बाई कमला खड़ी थी ऊसके चहरे पर मार के लाल और नीले निशान देख कर उससे कहा,“आज फिर तेरे पति ने तुझे पीटा एक तो वह कुछ काम नहीं करता और तुझे मारता भी है | ’’ सुनकर कमला रोने लगी और चुपचाप काम करने लगी | वह चार-पांच घरों में काम करके अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण करती थी |
कमला के माता-पिता की आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने के कारण उसका बचपन भी अभावों में ही बीता इसके साथ ही उसका जीवन तब और भी नरक हो गया जब वह चौदह वर्ष की अवस्था में ही हाथ-पैरों से सही सलामत लेकिन बेरोजगार रामदास नामक व्यक्ति के साथ ब्याह दी गयी | वह आलस्यवश घर में ही पड़ा रहता | चूंकि कमला मेहनतकश लडकी थी तो चार-पांच घरों में झाड़ू-पोंछा व बर्तन धोने का काम करने लगी ,इस तरह अपनी जीविका चलने लगी| उधर रामदास कमला द्वारा कमाए गए पैसों से अपनी सारी जरूरतें पूरी करता था उसे नशे की लत लग गयी थी | समय बीतता गया और कुछ ही वर्षों में कमला पांच बच्चों की माँ बनी साथ ही अधिक काम करने के कारण और तीन अजन्मे बच्चों के कारण उसका शरीर बहुत थक चुका था सूख कर कंकाल हो गया | काम करने की उसकी शारीरिक क्षमता और सुंदरता भी जाती रही | कमला ने उसे बहुत समझाया लेकिन वह नहीं समझ सका जिस दिन वह पैसे ना देती उसकी पिटाई भी कर देता और लड़ झगडकर सारे पैसे छीन लेता | इस तरह कमला भी बहुत दुखी हो गयी एक दिन नशे की हालत में पड़े हुए पति को ही अपने बच्चों के साथ मिलकर घर से बहार निकाल दिया | दूसरे दिन जब वह मेरे घर काम करने आई तो उसने अपनी सारी व्यथा सुनाई और अंत में बोली ,“मेम साब , आज मैंने भी उसको (रामदास) घर से बाहर निकाल दिया|”सुनकर मैंने कहा , “कमला तुझे ऐसा नहीं करना चाहिए |तुझे उसकी बुरी आदतें छुड़ाने की कोशिश करनी चाहिए जब अपनी बुरी आदत छोड़ देगा तो काम भी करेगा |” कैसे छुडाऊँ मेम साब ?कमला नेपूछा मैंने उसे नशा उन्मूलन केन्द्र जाने की सलाह दी और कमला ने वैसा ही किया छ महीने में रामदास बिलकुल ठीक हो गया और अब काम पर भी जाने लगा तथा कुछ पैसे भी कमाकर लाने लगा अब कमला की गृहस्थी भी सुचारू रूप से चलने लगी और उसके स्वास्थ्य में भी सुधार होने लगा तथा बच्चों और पति के साथ सुख पूर्वक रहने लगी और मैं भी खुश थी कि मैंने कमला के परिवार को सुखी जीवन जीने की सही राह दिखाई जिससे उसका परिवार सुख पूर्वक रहने लगा | ————-*******————



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
January 30, 2014

सच है इस सेवा भाव से ही समाज सुंदरम और शिवम् हो पता है.बहुत सुन्दर

nishamittal के द्वारा
January 28, 2014

शिक्षाप्रद लघु कथा

    alkargupta1 के द्वारा
    January 30, 2014

    धन्यवाद निशाजी


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